फ़त्तो बांदरी
मेरी रातों के पीछे एक भूरी बिल्ली रहती है कोशिश भी रहती है कि जिस भी कोने में फैली हो वो अपनी आलीन नींद के साथ वहाँ ना जाया जाए उसे छूने की इच्छा को दाँत पीस के दबा लिया जाये वो मेरा रंगीन फ़र्श उसपे एक जम्हाई सोफ़े के झरोखे में उलझे हुए कई नाख़ून मेरी कमीज़ की हर सिलवट के तले मुलायाम बाल भूरी बिल्ली कंबल में खो जाती है आरामखोर मेरी उँगलियों के चंगुल में मचलती है छिटक के छाती से होती हुई गोदी से मुड़ती हुई झपकते ही पहुंच जाती है बुकशेल्फ के ऊपर आँख से आँख मिलाऊँ तो "नीम! नीम-आउ" कहती है मुझे पूरी रंगरेज़ ट्यूबलाइट की सफेदी में काली और मेरी धूप में सुनहरी जब मैं सितारा बनती हूँ तब मुझे सितारा रहने देती है वैसे तो भूरी बिल्ली मेरे बचपन से भी छोटी है फिर भी तूफ़ानी शामों में मेरे पैरों के कोनों को दबाए रखती है अपने पैरों से देखो मेरी टाँगें बैठीं हैं लेकर उसके लाड के कितने निशान लगता था मैंने पाला है उसे और अब जब अपने दिन को जकड़ के रोती हूँ मैं मेरी कसी हुई बाजुओं में एक पालना ढूँढ़ लेती है सोती है एक भूरी बिल्ली महीनों महीनों तक मेरे हाथों के पालने में कैसे सोती है एक भूरी बिल्ली


Hatho ke palnemain soti hai meri bhuri billi ,wah.
Dhwani i want to hear it in your voice.